Error message

Warning: Creating default object from empty value in ctools_access_get_loggedin_context() (line 1411 of /var/www/html/sites/all/modules/ctools/includes/context.inc).

महानिदेशक का संदेश

देश की शिक्षा प्रणाली में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के प्रयोजन से अमूलचुल परिवर्तन हो रहा है। भारत सरकार द्वारा डिजिटल भारत पहल का शुभारंभ किए जाने से कौशल विकास तथा क्षमता निर्माण अत्यधिक महत्वपूर्ण हुआ है। यह अभियान तीन मूल स्तम्भों पर आधारित है जिसमें- प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगिता के रूप में डिजिटल अवसंरचना, माँग पर शासन व सेवाएं तथा नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण का सृजन करना है।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीईआईटीवाई), संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अन्तर्गत राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) एक निकाय है जिसे आज देश के सभी क्षेत्रों तथा समाज के सभी खण्डों तक पहुँच की दृष्टि से अद्वितीय स्थान प्राप्त है। नाइलिट, भारत में एक प्रोफेशनल परीक्षा निकाय भी है, जो विशेष रूप में शिक्षण एवं प्रशिक्षण के अनौपचारिक क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिकी में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रत्यायित करता है। यह सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिकी, संचार प्रौद्योगिकियों, हार्डवेयर, साइबर कानून, साइबर सुरक्षा, आईपीआर, जीआईएस, क्लाउड कम्प्यूटिंग, ईएसडीएम, ई-शासन तथा संबद्ध विषयों पर अर्हता प्राप्त मानव संसाधन के विकास में सक्रियता से शामिल है। यह संस्थान भारत में कौशल विकास तथा क्षमता निर्माण के परिदृश्य से एक अद्वितीय पहचान एवं विशिष्टता प्रदान करता है। कई सरकारी विभागों ने नाइलिट को तृतीय-पक्ष एजेंसी के रूप में तकनीकी जनशक्ति की भर्ती का दायित्व सौंपा है जो न केवल पारदर्शिता का सुनिश्चय करता है बल्कि, नाइलिट में उपलब्ध तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग भी अन्य संगठनो के साथ सहक्रिया तैयार करने में की जा रही है।

नाइलिट ने आईईसीटी के क्षेत्रों में मानक स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए हैं और सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिकी उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार उभरते क्षेत्रों में बाजार उन्मुखी पाठयक्रमों  का विकास किया है। इसके अतिरिक्त, नाइलिट राज्य सरकारों तथा केन्द्रीय मंत्रालयों के लिए क्षमता-निर्माण के लिए प्रधान एजेंसी भी है।

तत्कालीन, सीईडीटीआई (आइज़ोल, औरंगाबाद, कालीकट, गोरखपुर, इम्फाल, जम्मू/श्रीनगर तथा गुवाहाटी/तेजपुर स्थित) तथा आरसीसी (चण्डीगढ़ तथा कोलकाता) का विलय डीओईएसीसी के साथ होने के परिणामस्वरूप इस बृहत् संस्थान का नाम अक्तूबर, 2011 में बदलकर नाइलिट किया गया। इस विलय के कारण प्रक्रिया पुनः इंजीनियरी तथा मानकीकरण के प्रयास आवश्यक हुए जिससे विभिन्न इकाइयों का विलीन किया जा सके तथा एक विलयित संसक्तिशील इकाई के रूप में भारतीय आधार पर सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जा सके।

ऑनलाइन उपस्थिति पर बल देते हुए, नाइलिट ने हाल के समय में पोर्टलों के माध्यमों से पणधारियों, विशेष रूप से विद्यार्थियों, को सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाया है जो एक छोर से दूसरे छोर तक समाधान उपलब्ध कराता है, जिसमें पाठयक्रमों  में पंजीकरण, ई-अधिगम, ऑनलाइन-परीक्षा, डिजिटल प्रमाण-पत्र शामिल है तथा जिसे स्वतः एसएमएस एवं आधार समर्थित प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण (डीबीटी) योजनाओं का समर्थन प्राप्त है। इस प्रक्रिया को डिजिटल लॉकर प्रौद्योगिकी से भी प्रबलित किया जा रहा है।

हमारे प्रयासों से प्रौद्योगिकी एवं ऑनलाइन  सेवाओं के अधिकाधिक प्रयोग के माध्यम से अधिक पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने हेतु मुझे विश्वास है कि अपने 40 केन्द्रों, 900 प्रत्यायित प्रशिक्षण भागीदारों तथा 7000 सुविधा केन्द्रों की बढ़ती संख्या से हाल के समय में प्राप्त किए गए उच्च विकास के क्रम में आगे अपनी परियोजनाओं में सुधार करेगा। नाइलिट, एक राष्ट्रीय संस्थान के रूप में भारत सरकार के ‘स्किल इंडिया‘ तथा ‘डिजिटल इंडिया’ के नेतृत्व में ‘मेक इन इंडिया‘ के लक्ष्य को समर्थन देने में सहायक है।

Hindi