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निदेशक के डेस्क से

एक सर्वभारतीय संगठन के रूप में नाइलिट और नाइलिट जम्मू तथा कश्मीर के बारे में कुछ अच्छी बातें कहने का समय आ गया है, लेकिन वह किसी दृढ़ निश्चय या तर्क के बिना नहीं होगा। यह प्रतिवर्तन शीर्षस्थ स्तर पर अधिकारियों के नेतृत्व की गतिशीलता और पूरे देश के कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों के कारण सम्भव हुआ है। जम्मू तथा कश्मीर में नाइलिट आईईसीटी के क्षेत्र में प्रशिक्षण तथा परामर्श-सेवा प्रदान करने वाला एकमात्र बृहत्तम संगठन है और इसके निशान पूरे जम्मू तथा कश्मीर में व्याप्त है।

विगत समय में एक कठिन परिस्थिति से गुजरने के बावजूद, एक अग्रणी सूचना प्रौद्योगिकी-मानव संसाधन विकास संगठन के रूप में इसका आविर्भाव काफी असाधारण रहा है। जब मैं इस लेख को लिख रहा हूँ, हम 450 से अधिक विद्यालयों में 3 महीने की अवधि में 30 करोड़ रु. की अनुमालित परियोजना लागत से कम्प्यूटर प्रयोगशाला सहित स्मार्ट क्लास रूम स्थापित करने के लिए जम्मू तथा कश्मीर सरकार के शिक्षा विभाग के साथ एक सहमति-ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। इससे जम्मू तथा कश्मीर के विद्यालयों में ई-अधिगम को बढ़ावा देने तथा डिजिटल साक्षरता का प्रसार करने में सहायता मिलेगी।

लगभग पाँच वर्ष पहले 500 से भी कम विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करने वाले संस्थान से आगे बढ़कर यह केन्द्र अब प्रतिवर्ष 20,000 से भी ज्यादा विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर रहा है। इनमें सरकारी तथा कार्पोरेट कर्मचारी, रक्षा कार्मिक, प्रोफेशनल, तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी तथा सामान्य विद्यार्थी शामिल हैं। राष्ट्रीय कुशलता विकास प्रयास के एक भाग के रूप में, सूचना प्रौद्योगिकी कुशलता, आईटीईएस-बीपीओ, इलेक्ट्रॉनिक उपस्करों की मरम्मत एवं अनुरक्षण तथा ईएसडीएम परियोजना के क्षेत्रों में ग्रामीण प्रशिक्षण जम्मू तथा कश्मीर राज्य में आरम्भ किए गए। राज्य के नव निर्वाचित पंचों तथा सरपंचों को नाइलिट जम्मू तथा कश्मीर में बीसीसी नामक सूचना प्रौद्योगिकी साक्षरता कार्यक्रम के जरिए कम्प्यूटरों का परिचय मिला और ऑनलाइन परीक्षा में बैठने के जरिए उन्होंने प्रक्रिया को पूरा किया। उनके लिए यह एक बहुत ही अनूठा अनुभव था।

कश्मीर विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बम्बई, सिसको, ओरेकल, सी-डैक, आईएसईए, सर्ट-इन के साथ शैक्षिक सम्पर्क स्थापित करने के कारण हमें औपचारिक तथा अनौपचारिक पाठ्यक्रमों का एक समृद्ध मिश्रण उपलब्ध कराने में सहायता मिली है। इसमें एमसीए, पीजीडीसीए, ओ/ए/बी, सीसीएनए, सीसीएनपी, ओसीए, ओसीपी, सीईएच पाठ्यक्रम शामिल हैं, जिन्हें उद्योग का समर्थन मिला है। विशेष रूप से वेण्डर विशिष्ट कार्यक्रम विद्यार्थियों की रोजगार योग्यता में अभिवृद्धि करने में बहुत सहायक पाए गए हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बम्बई के साथ हाल ही में की गई बातचीत के फलस्वरूप हमारे शैक्षिक कार्यक्रमों में सुखद एवं अभिनव विचार प्राप्त हुए है। मुक्त स्रोत साधनों, शोध की कार्यपद्धतियों आदि में राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाओं के आयोजन ने लगभग एक दर्जन संस्थानों के 200 से ज्यादा शिक्षक-वर्ग के सदस्यों तथा शोध विद्यार्थियों को समृद्ध किया है। अनुसंधान एवं विकास का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रथम वर्ष में ही, केन्द्र को दो प्रतिष्ठित अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएँ प्राप्त हुई हैं : इनमें से एक का महत्व हमारी पारिस्थितिकी के लिए बहुत अधिक है, जिसके अन्तर्गत बेतार सेंसर नेटवर्कों का प्रयोग करके डल झील के पानी की गुणवत्ता की निगरानी करने के लिए एक प्रोटोटाइप का विकास किया गया है।

सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित संसदीय परामर्शदात्री समिति की एक सिफारिश के अनुसरण में, नाइलिट ने श्रीनगर तथा जम्मू दोनों ही स्थानों पर आईएसईए (सूचना सुरक्षा शिक्षण एवं जागरूकता) कार्यक्रम के एक भाग के रूप में कम्प्यूटर फोरेन्सिक प्रयोगशालाएँ स्थापित की हैं। इन परियोजनाओं के अन्तर्गत विकसित प्रयोगशालाओं का प्रयोग जम्मू तथा कश्मीर पुलिस सहित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कार्मिकों को प्रशिक्षित करने के लिए किया जा रहा है।

इस केन्द्र ने एनईजीपी के अन्तर्गत स्वॉन, एसएसडीजी जैसी विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए जम्मू तथा कश्मीर सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को परामर्श-सेवाएँ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने एसएसआरबी की ओर से भर्ती के प्रयोजन से 90,000 से ज्यादा उम्मीदवारों की कम्प्यूटर आधारित टाइपिंग परीक्षा का आयोजन किया और विभिन्न विभागों में सूचना प्रौद्योगिकी मूलसंरचना स्थापित की।

जहाँ तक रोजागार का संबंध है, हमारे विद्याथियों को लाभजनक रोजगार प्राप्त करने के पर्याप्त अवसर प्राप्त हुए। एमसीए के प्रथम बैच में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का शत प्रतिशत रोजगार तथा एक कैलेण्डर वर्ष में लगभग 200 ओ/ए/बी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का ग्रामीण विकास विभाग तथा श्रम कल्याण बोर्ड में रोजगार और स्थानीय रोजगार बाजार में हमारे विद्यार्थियों को प्राप्त तरजीह हमारे इस दावे का प्रमाण है।

हम महसूस करते हैं कि हमें अभी भी लम्बी दूरी तय करनी है। इस केन्द्र के कर्मचारियों द्वारा निरन्तर प्रयासों को जारी रखने से ही यह संभव हो सकता है, लेकिन नाइलिट, नई दिल्ली के प्रबंध निदेशक के मार्गदर्शन तथा प्रोत्साहन को हम विस्मरण नहीं कर सकते। वस्तुतः हम उनकी दूरदर्शिता को ही नाइलिट को ई-शासन, कम्प्यूटर फोरेन्सिक आदि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में अगुवाई करने वाले संगठन में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग में लाएंगे।

हम निकट भविष्य में एम.टेक स्तर तक औपचारिक इंजीनियरी पाठ्यक्रम तथा प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास के कार्यक्रम शुरू करने के जरिए गुणात्मक एवं मात्रात्मक दोनों ही दृष्टियों से हमारे कार्यक्रमों का स्तर बढ़ाने की भी अभिकल्पना करते हैं।
इंशा अल्लाह

                                                                                                                                                                    निदेशक
                                                                                                                                                                   ए.एच. मून

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